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ऐसा है सबका साथ और उच्चवर्ण का विकास।वोट बहुजन का राज उच्चवर्ण का।

उत्तर प्रदेश लखनऊ

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर अपने जाती को आगे बढ़ाने क आरोप लगाकर सत्ता में आयी और पैराशूट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक ऐसा ही संविधान को कालिख पोतनेवला कारनामा सामने आया है।

यह सभी को पता ही है की भाजपा सिर्फ वोटो की करती है चाहे किसी भी तरह से उसका लाक्षा सिर्फ वोट होता है। पर अपने इस कार्य में वो सबसे लुभावना नारा जो देती है वो है सबका साथ सबका विकास।

यहाँ पुराना जातिवाद आपको ख़ास करने दिखाई देगा जिसमे उच्चवर्ण सबसे हावी रहता है। और यह भी क्यों ना हो तब जब एक मुख्यमंत्री और एक उप-मुख्यमंत्री उच्चवर्ण से हैं।

प्रदेश के चर्चित आईजी अमिताभ ठाकुर की पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर ने सूचना के अधिकार के तहत लखनऊ के थाना प्रभारियों की सूचना मांगी थी। इस आरटीआई पर एसएसपी लखनऊ कलानिधि नैथानी ने 25 जून 2019 के लखनऊ के थाना प्रभारियों की सूचना दी है, सूचना के मुताबिक राजधानी के ज्यादातर थानों में क्षत्रिय या ब्राह्मण समुदाय के प्रभारी नियुक्त हैं।

लखनऊ के कुल 43 थानों की जानकारी में, जिनमें से 14  थानों पर क्षत्रिय, 11 पर ब्राह्मण, 9 पर अन्य पिछड़ा वर्ग, 8 पर अनुसूचित जाति और महज 1 थाने पर सामान्य मुस्लिम थाना प्रभारी नियुक्त है। इस प्रकार लखनऊ के कुल थाना प्रभारियों में 60 फीसदी थाना प्रभारी क्षत्रिय या ब्राह्मण जाति के हैं, जिसमें अकेले क्षत्रिय जाति के एक-तिहाई थाना प्रभारी हैं। मतलब साफ़ है एक मुख्यमंत्री और एक उप-मुख्यमंत्री की अपनी जाती का ही बोलबाला है।तीसरे उप-मुख्यमंत्री जिनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया उनकी अपनी जाती का महज एक व्यक्ति थाना प्रभारी हैं।

पिछड़ा वर्ग जिनको ओबीसी कहा जाता है उनके के मात्र 20 फीसदी और अनुसूचित जाति के 18 फीसदी थाना प्रभारी वर्तमान समय में लखनऊ में तैनात हैं। आरटीआई के जवाब में दी गयी सूचना के अनुसार पिछड़ा वर्ग में 6 थाना प्रभारी कुर्मी, 1 काछी, 1 मौर्य और 1 मुस्लिम हैं। जबकि लखनऊ के किसी भी थाने में यादव समुदाय का कोई भी थाना प्रभारी नियुक्त नहीं है।

लखनऊ जिले में दो 2 मुस्लिम थानाध्यक्ष हैं, जिनमे सामान्य वर्ग के फरीद अहमद अलीगंज और पिछड़ा वर्ग के मोहम्मद अशरफ थाना जानकीपुरम में तैनात हैं। इस तरह से थाना प्रभारियों की तैनाती में शासनादेश संविधानिक व्यवस्था का साफ उल्लंघन है।

और साथ में भाजपा और उनके नारे की सच्चाई सबके सामने आ जाती हैं। लुभावने नारे देकर सत्ता में आने के बाद भाजपा का नेतृत्व कभी भी बहुजन जनता के साथ न्याय नहीं करता हैं। इसके विपरीत जब जब बहुजन सत्ता में रहा है उसने किसी भी समाज के साथ अन्याय नहीं होने दिया। सामाजिक जातीय संतुलन साधकर समाज को आगे बढ़ाने में बहुजन विचारधारा भाजपा को हजम नहीं होती इसी कारण वो वो किसी भी भी तरह बहुजन समाज को हाशिए पर धकेलना चाहती हैं।

ना होते हुए भी मीडिया द्वारा सबसे ज्यादा यादव एस डी एम की अफवाह उड़ाकर समाजवादी सरकार को बदनाम करने का काम से भी उसे गुरेज नहीं रहता।

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