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भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका, मंदी के मिलने लगे संकेत, आयकर में 50 हजार करोड़ की कमी

नई दिल्ली: 

देश की अर्थव्यवस्था मंदी की तरफ बढ़ रही है, क्योंकि कई प्रमुख आर्थिक संकेतकों में गिरावट देखी गई है। ऑटो बिक्री में गिरावट, प्रत्यक्ष कर संग्रह में कमी के बाद अब देश में घरेलू बचत में भी गिरावट आई है। सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी की तुलना में घरेलू बचत गिरकर 2017-18 में 17.2 प्रतिशत हो गई, जो 1997-98 के बाद से सबसे कम दर है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े के अनुसार, चूंकि घरेलू बचत में गिरावट आई है, लिहाजा इसने निवेश को 2012 से 2018 के दौरान 10 आधार अंकों तक नीचे गिरा दिया है। प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर भी संग्रह लक्ष्य के अनुरूप नहीं रहा है.एक अप्रैल को जारी आंकड़े के अनुसार, प्रत्यक्ष कर संग्रह कमजोर निजी आय कर संग्रह के कारण 50,000 करोड़ कम हो गया। इसके कारण वित्त वर्ष 2018-19 के लिए संशोधित 12 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका।

सूत्रों ने कहा कि निजी आय कर का 5.29 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका और इसमें भी 50,000 करोड़ रुपये की कमी रही। इसके कारण वित्त वर्ष 2018-19 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह को नीचे गिरा दिया। सोसायटी ऑफ भारतीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़े के अनुसार, घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की बिक्री में वर्ष दर वर्ष आधार पर मार्च में 2.96 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 291,806 वाहनों की रही। यात्री वहनों की घरेलू बिक्री 2018 में 300,722 वाहनों की रही।

हालांकि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान यात्री वाहनों की बिक्री में 2.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में भी मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान सात प्रतिशत की गिरावट आई जो 33.49 अरब डॉलर रहा। जबकि एफडीआई पिछले कुछ वर्षो से बढ़ रहा था। अप्रैल-दिसंबर 2017-18 की अवधि के दौरान एफडीआई 35.94 अरब डॉलर रहा था।

इन प्रमुख आर्थिक मोर्चो में मंदी के आधार पर अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है। पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “दरअसल, नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद गैर-कॉरपोरेट सेक्टर प्रभावित हुआ, और वह दिखाई दे रहा है।” उन्होंने कहा कि आर्थिक संकेतकों में आगे और गिरावट आएगी, क्योंकि गैर-कॉरपोरेट सेक्टर ही भारत में ज्यादातर रोजगार पैदा करता है और यही सेक्टर सर्वाधिक प्रभावित हुआ है।

जीडीओ में घरेलू बचत की हिस्सेदारी में गिरावट पर उन्होंने आईएएनएस से कहा, “वास्तव में घरेलू बचत ही सरकार की उधारी जरूरतों और कॉरपोरेट की उधारी जरूरतों के लिए धन मुहैया कराता है।”

उन्होंने कहा, “यदि घरेलू बचत में गिरावट आती है, तो इससे या तो निवेश में गिरावट आएगी या फिर चालू खाता घाटा बढ़ेगा। “

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