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धर्ममुक्त विचारधारा के जन्मदाता कश्मीर सिंह सागर नहीं रहे

लखनऊ 

धर्ममुक्त विचारधारा धीरे धीरे जनमानस पर छा रही थी इसका प्रमाण आपको इस से मिल जाता है की खुद को धर्ममुक्त बतानेवालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

इसी विचारधारा के प्रणेता कश्मीर सिंह सागर नहीं रहे। पुख्ता सुचना के अनुसार उनका घरेलु एक्सीडेंट में देहांत हो गया।

धर्ममुक्त विचारधारा यह एक धर्मों  के ढकोसले उजागर कर के लोगों में जागृति ला रहा है। हालांकि यह उनकी खुद की खोज नहीं थी बल्कि वर्तमान में मौजूद धर्मग्रंथो का सहारा लेकर उन्ही का खोखलापन उजागर करते थे। आप ऐसे भी कह सकते है वो सिर्फ धर्मों  और धर्मग्रंथो का सच सामने ला देते थे और उनका खोखलापन खुद बखुद सामने आ जाता था।

चाहे किसी भी धर्म की बाते हो वो उजागर करने से कतराते नहीं थे। तथाकथित हिन्दू हो,इस्लाम हो,क्रिस्चियन हो या बौद्ध हो उनके कहे सच से कोई बच नहीं पाया और तो खास बात यह थी की उनकी बातों कोई काट भी नहीं सकता है। क्यों की वो उन्ही धर्मग्रंथो की बात करते है जिनको धर्म लोग मानते है।

उन्होंने हमेशा ही धर्म से हटकर मानवतावादी विचारधारा को अपनाने की बात कही और हमेशा उसी पर जोर देते रहे। धर्म के साथ साथ वो जातिवाद को भी नकारते रहते थे।

मानवता को अपनाने क लिए धर्म के ढकोसलों से बाहर निकलना होगा यह जरुरी है यह उनका कहना है और कोई भी व्यक्ति जो मानवता को सामने रखता है वो इस बात को नकार नहीं सकता है।

धर्म और जातिमुक्त भारत बनाना उनका संकल्प था। 

इस से पूर्व वो सेना में रहकर देश सेवा का कार्य भी कर चुके थे। इसी के साथ साथ वो एक अच्छे कवी भी थे।

अब उनके इस कार्य को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निहाल सागर और शुभांशु सिंह चौहान आगे बढ़ाएंगे।

भारत गण की और से उनको श्रंद्धांजलि और उनका कारवाँ  आगे बढ़ता रहे यही कामना।

उस कार्य में भी भारत गण  समूह धर्ममुक्त के साथ है।

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