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भारत में अनिवार्य मतदान की व्यवस्था व्यवहारिक नहीं,EVM से ही चलेंगे

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत अनिवार्य मतदान के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि मतदान को अनिवार्य करना भारत जैसे देश के लिए उपयुक्त और व्यवहारिक नहीं है। यहां की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां लोगों को मतदान के लिए बाध्य करने और मतदान न करने पर उन्हें दंडित करने के अनुकूल नहीं हैं। इसके बजाय स्वैच्छिक मतदान को प्रोत्साहित करना ही सही तरीका है।

रावत ने यह बात अमर उजाला के साथ एक विशेष बातचीत में कही। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह दावा भी किया कि आने वाले सभी चुनाव वीवीपैट युक्त ईवीएम मशीनों से ही कराए जाएंगे और यह मशीनें पूरी तरह टेंपर प्रूफ हैं। यानि इनसे किसी भी तरह की छेड़छाड़ या हैकिंग संभव नहीं है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि इसी साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए आयोग पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि आयोग अपने कैलेंडर के हिसाब से तैयारी करता है। सारी तैयारी योजनाबद्ध होती है और काफी पहले से गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों की तैयारी चुनाव आयोग ने फरवरी 2018 से शुरू कर दी थी और इस साल होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारी भी जुलाई 2018 से शुरू कर दी गई थी। बीच में तेलंगाना की विधानसभा भंग हो गई, तो फौरन उसका संज्ञान लेकर तैयारी शुरू कर दी गई। आयोग ने तीन राज्यों का दौरा भी कर लिया है और बाकी राज्यों का दौरा भी जल्दी ही कर लिया जाएगा।

ईवीएम को लेकर विपक्षी दलों में उठ रहे संदेह और सवालों के बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि राजनीतिक दल चुनाव प्रक्रिया का बेहद जरूरी हिस्सा हैं, उन्हें संतुष्ट करना और उनकी शंकाओं का समाधान करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मतपत्र व्यवस्था में कई खामियां थीं, जिसके चलते कई बार वोट अवैध हो जाते थे। बूथ कब्जे की घटनाएं भी होती थीं।

देश की बदनामी होती थी और विदेशों में लोग कहते थे कि भारतीयों को अभी तक मतदान करना नहीं आया। बाहुबली उम्मीदवारों में होड़ होती थी कि कौन ज्यादा बूथ कब्जा करके चुनाव जीत ले। लेकिन अब ये सारी कमियां दूर हो गईं हैं। अभी चुनाव आयोग तीसरी पीढ़ी की एम-3 मशीनें लेकर आया है जो पूरी तरह सुरक्षित हैं। आयोग को विश्वास है कि राजनीतिक दलों की शंकाएं और संदेह दूर होंगे। वीवीपैट की पर्चियों को लोगों को देने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस पर विचार जारी है।

रावत ने बताया कि 2017 में सभी राजनीतिक दलों की बैठक में तय हुआ था कि सभी चुनावों में वीवीपैट मशीनों का उपयोग होगा। चुनाव आयोग उस पर पूरी तरह अमल कर रहा है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव में हर मतदान केंद्र पर वीवीपैट युक्त मशीनों से ही मतदान कराया जाएगा।

मतगणना में संदेह होन पर कम से कम 25 फीसदी बूथों पर वीवीपैट पर्चियों की गिनती कराने की राजनीतिक दलों की मांग पर उन्होंने कहा कि यह नियम है कि जहां जिस मतदान केंद्र पर गड़बड़ी की शिकायत हो वहां निर्वाचन अधिकारी को यह अधिकार है कि वह वहां वीवीपैट की पर्चियों की गिनती कराने का आदेश दे सकता है। इसमें किसी प्रतिशत की सीमा नहीं है। मतगणना अधिकारी अगर चाहे तो शत प्रतिशत पर्चियों की गिनती करा सकता है।

टीएन शेषन ने चुनाव आयोग का जो दबदबा कायम किया था, उसमें कमी क्यों आई है, इस सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत कहते हैं कि यह सिर्फ एक धारणा है। उस एतिहासिक दौर के बाद जितने भी मुख्य चुनाव आयुक्त आए सभी ने आयोग के कामकाज में कुछ न कुछ योगदान दिया है। पूरे विश्व में भारत के चुनाव आयोग की छवि में इजाफा हुआ है और अब तक हुए सभी चुनाव निष्पक्षता और पारदर्शिता से संपन्न होते रहे हैं।

चुनाव आयोग पर सरकारी दबाव के आरोप को खत्म करने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भी सीबीआई निदेशक की तर्ज पर सरकार विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा करने के सवाल पर रावत ने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपति, संसद और सरकार पर निर्भर करता है।

पार्टियों के खर्च की सीमा तय करने के सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इसे लेकर आयोग ने अपने स्तर पर कई कदम उठाए हैं। उम्मीदवारों को सरकारी खर्च पर चुनाव लड़ने के सुझाव पर रावत का कहना है कि इसके लिए चाक चौबंद कानूनी इंतजाम जरूरी है। वरना इसका भी दुरुपयोग होगा।

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