Friday , August 23 2019
Breaking News
Home / States / कानूनी जंगलराज : ऐसा है उत्तर प्रदेश और बिहार

कानूनी जंगलराज : ऐसा है उत्तर प्रदेश और बिहार

उत्तर प्रदेश 

पुलिसिया कारनामें तो सभी लोग जानते है। पर बात इतनी आगे बढ़ जाती है की उस व्यवस्था को लोग जंगलराज नाम से जाने जाते हैं। जहाँ अपराधियों का ही बोलबाला होता हैं। पुलिस असहाय हो जाती हैं और लोगो का पुलिस के ऊपर से भरोसा ख़त्म हो जाता हैं।

लेकिन अगर यही बात दूसरे तरीके से हो जाए और पुलिस,प्रशासन और राजनेता ही ऐसे कारनामें  में शामिल हो,तो आप उसे क्या कहेंगे?

इसे कानूनी जंगलराज कहना गलत नहीं होगा। 

जब से भाजपा और योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में सत्ता संभाली हैं ज्यादातर अपराधियों को पकड़ने के बजाए उनका एनकाउंटर करने में ज्यादा भरोसा करने लगे हैं। शायद पुलिस प्रशासन को भी इसकी खुली छुट  दे दी हैं।

इसके पश्चात कई पुलिस एनकाउंटर पर सवाल उठे,कई एनकाउंटर आपसी रंजिश में अंजाम दिए गए और कई एनकाउंटर सिर्फ बहुजन और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हथियार बनाकर प्रयोग करने का आरोप लगा। कई जांच के घेरे में भी आए। कई बार यह भी आरोप लगे की एनकाउंटर से बचना है तो पुलिस को पैसे दो। एक तरह से उगाही का धंधा अधिकारिक रूप से चालू किया गया पुलिस प्रशासन द्वारा। फिर भी प्रशासन इसे अपनी कामयाबी के तौर पर देखने लगा है।

अभी अभी ताजा मामला  देखे तो पुलिस द्वारा एक लड़की को पकड़कर मुस्लिम मित्र के बारे में अपमानजनक टिपण्णी और दूसरा एप्पल के कर्मचारी की पुलिस द्वारा की गयी हत्या का हैं। क्या यह पुलिस प्रशासन को खुली छूट देने का परिणाम तो नहीं हैं। जिस से पुलिस को यह गुमान हो गया की वो जिसे चाहे जब चाहे मार सकती है और एनकाउंटर के नाम पर उसे छुपा सकती हैं।

अब अलगता हैं अपराधियों में और पुलिस में कोई फर्क नहीं रह गया हैं। जो काम अपराधी करते थे वही काम अब पुलिस खुलेआम करने लगी है और एनकाउंटर के पीछे अपने गुनाह छिपानी लगी है। वैसे एक ख़ास समुदाय के अपराधी कभी एनकाउंटर में मारे गैर ऐसा दिखाई नहीं दिया।

अब आते है बिहार 

यहाँ तो असलहे आम हैं। आप कई लोगो के फेसबुक के प्रोफाइल में भी उनकी फोटो असलहों  के साथ देख सकते है।

यहाँ जैसे प्रशासन के आशीर्वाद के साथ ही सारे जुर्म अंजाम दिए जाते हैं।

मुज़्ज़फफरपुर का काण्ड किसी से छिपा नहीं हैं। आये दिन बिहार में होनेवाली हत्याएं,बलात्कार के मामले,महिलाओ पर बढ़ते अत्याचार इसमें पुलिस की भूमिका संदेहास्पद रही है। कुछ महीने पहले ही एक औरत को नंगा घुमाया गया फिर भी पुलिस की भूमिका लीपापोती करने की रही।

जातीय अत्याचार 

बहुजन वर्ग के लोगों पर होनेवाले अत्याचार किसी से छुपे नहीं हैं। उनके घर जलाए  जाते हैं और कोई खबर लेनेवला नहीं होता।उनकी बहन बेटियों पर अत्याचार होता है और उस मामले में लीपापोती कर दी जाती है। कई बार उसकी FIR तक नहीं होती। जो मदद करना चाहते है उन्हें धमकाया जाता हैं। सभी तरह से जातिवाद उसका सड़ा  हुआ रूप आप देख सकते हैं।

सुशिल मोदी 

अभी लगातार होनेवाली हत्याओं के सिलसिले में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशीलकुमार मोदी का बयान  आया की वो असहाय होकर अपराधियों के हाथ जोड़ रहे है की काम से काम पितृ पक्ष में किसी की हत्या ना करें।

उनकी विनती से यह प्रतीत होता है की पितृ पक्ष के बाद उन्होंने अपनी और से खुली छुट दी है हत्याएं करने के लिए।

इसे कानूनी जंगलराज ही कहाँ  जाना चाहिए।

इनकी असहायता है या अपराधियों के साथ सांठगांठ हैं। यह समझ से बाहर दिखाई देता हैं।जनता को असहाय नहीं बल्कि मजबूत नेता की जरुरत है जो अपराधियों पे लगाम लगा सके। ना की उनके हाथ जोड़ कर उनसे विनती करे। हाथ जोड़कर विनती करने के लिए उनकी कुर्सी नहीं हैं।

भाजपा का असर 

भाजपा अक्सर उच्चवर्ण की पार्टी मानी गयी है और अभी अभीमकुछ अख़बारों ने लिखा भी है ब्राम्हण और वैश्य समाज द्वारा भाजपा चलाई जाती हैं। ज्यादातर बहुजान नेता यही कहते है की भाजपा सिर्फ वोटों के लिए ही बहुजन लोगो से सहानुभूति दिखाती हैं और सत्ता के लिए सिर्फ उच्च वर्ण ही रहता है।

इस वजह से लोगों में जातिवादी सोच को बढ़ावा मिलता है और उसका असर आपको पुलिस,प्रशासन और राजनेताओं पर भी दिखता हैं। ज्यादातर लोगों का यही कहना है ज्यादातर पत्रकार उच्चवर्ण से आते है और लगभग सभी मीडिया संस्थानों में ऊँचे पदों पर उच्च वर्ग होने की वजह से इन दो राज्यों में जंगलराज की स्थिति होनेपर भी वो चुप हैं। जब की इस से पहले राष्ट्रिय जनता दल के समय इस से अच्छे हालातों में भी जंगलराज कहाँ जाता था।

About Bharat Gan

Check Also

17 जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल किया। पर अब इनका कोटा 32% तक बढ़ाएंगे या सिर्फ राजनीति होगी?

उत्तर प्रदेश लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया की 17 जातीयां …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *