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चुनावी चौपाल: सपा बसपा को ख़त्म करना चाहती हैं कांग्रेस भाजपा?

उत्तरप्रदेश में पनपी सपा-बसपा को उत्तरप्रदेश में ही खत्म करना चाहती है भाजपा-कांग्रेस, पढ़कर जानिए कैसे?

उत्तरप्रदेश में भाजपा की स्तिथि बेहद खराब थी कांग्रेस मजबूत थी, कांग्रेस आम जनता को बेहतर भविष्य के सपने दिखाकर हर बार चुनाव जीत जाती थी। आजाद भारत के बाद उत्तप्रदेश में 1990 कांग्रेस का ही दबदबा रहा लेकिन उस समय मान्यवर साहब के द्वारा बनाई गई बहुजन समाज पार्टी राज्य के कोने-कोने में अपना परचम लहरा चुकी थी और कांग्रेस को राज्य से नेस्तनाबूद जैसा कर दिया।

बहुजन समाज पार्टी की गतिविधियों और राजनीति रवैये को देखकर भाजपा तिलमिला गई और बसपा को सरकार बनवाने के लिए समर्थन में खड़ी हो गई, भाजपा ने बसपा का सपा से किनारा करवा दिया शायद भाजपा को पता था कि अगर उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा मिल गयी तो कांग्रेस और भाजपा का सफाया हो जाएगा। भाजपा यही चाहती थी कि मायावती या बसपा का नेता जो भी मुख्यमंत्री बने वो हमारे समर्थन से बने और वही हुआ 1995, 1997 और 2002 में भाजपा के गठबंधन से बसपा सता में आयी।

जैसे ही 2007 में उत्तरप्रदेश में बसपा की पूर्ण बहुमत सरकार बनी तो भाजपा के खेमे में तहलका मच गया और सपा का रुख कांग्रेस की गया जो 2014 लोकसभा चुनावों में गठबंधन के रूप में देखने को मिला।
2012 में जैसे ही सपा की सरकार बनी तो कांग्रेस और भाजपा दोनों बसपा को अंदरूनी नुकसान पहुंचाने लगे और ठान लिया कि सपा और बसपा की राजनीति को उत्तरप्रदेश तक ही सीमित रखना है।

उदाहरण के तौर पर दिल्ली ले लीजिए, 2008 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी ने अपनी स्तिथि काफी मजबूत कर ली थी और 17-18% वोट अपने पलड़े में गिरा लिए। अब भाजपा और कांग्रेस दोनों नही चाहते थे कि आने वाले विधानसभा चुनावों में बसपा दिल्ली में अपनी सरकार बनाए।

भाजपा और कांग्रेस दोनों दिल्ली से पिछड़ रहे थे उनके पास कोई ऑप्शन नही था, आखिर उन्होंने आईआईटी धारी और आरक्षण विरोधी मचं के मुखिया अरविन्द केजरीवाल को नयी पार्टी (आम आदमी पार्टी) बनवाकर चुनावी मैदान में उतारा। दिल्ली के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के तबके के लोगों के दिमाग में बहुजन महापुरुषों की विचारधारा थी जो बसपा पार्टी के वजह से फैली।

हर जगह बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर की विचारधारा का प्रचलन था, लोगों के मुँह से “जय भीम” अभिवादन सुनने को मिल रहा था, तब इन धूर्त राजनीति करने वालों और गन्दी राजनीति की भेंट चढ़े गुर्गों ने हर मंच पर जाकर बाबा साहब के प्रवचन सुनाए, बाबा साहब का खूब महिमा-मंडन किया।

बस फिर क्या था भोले-भाले लोगों का ध्यान भटक गया और एक आरक्षण विरोधी मंच के मुखिया की नारेबाजी करने लगे क्योंकि उसने अपनी राजनीति चमकाने के लिए बाबा साहब का गुणगान करने में कोई कसर नही छोड़ी थी। अरविन्द केजरीवाल ने भारतीय संविधान की अच्छाइयाँ गिनाई, संविधान की शपथ ली लेकिन जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन्हीं के शासनकाल में संविधान की प्रतियां जलाई जाती है तो उनके मुँह में दही जम जाता है, सनद रहे वो 9 अगस्त हर भारतीय को याद है जिसकी संविधान में आस्था है।

अगर वर्तमान और लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो सपा-बसपा और रालोद के गठबंधन से भाजपा-कांग्रेस में बहुत भय है और उन्हें कामयाब होने से रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं और बहुजन समाज को बिखेरने में कामयाब भी हो रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी में कार्य कर चुके वामन मेश्राम, फूलसिंह बरैया, सावित्री बाई फुले, देवाशीष जरारिया, चंद्रशेखर उर्फ रावण अपने-अपने संगठन व पार्टी बनाकर कांग्रेस-भाजपा को मजबूती की ओर धकेल रहे है जिसका नुकसान सपा-बसपा के गठबंधन को ही होगा।

आरएसएस और अडानी-अम्बानी के इशारों पर चलने वाली भाजपा और भाजपा से अंदरूनी समझौता करने वाली कांग्रेस में बैठे धूर्तों ने ये तय कर रखा है कि कोई तीसरी पार्टी या गठबंधन केंद्र तक ना पहुंच पाए और 70 साल तक इस चाल में ये दोनों पार्टियां कामयाब भी रही है।

इन दोनों पार्टियों ने आज तक संविधान की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नही छोड़ी है, इन दोनों पार्टियों ने कभी संविधान को पूर्णरूप से लागू करने की बात नही कही।
बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर ने संविधान सभा का अपने भाषण में कहा था कि, “संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि उसको लागू करने वाले बुरे हैं, तो वह अंतत: बुरा ही साबित होगा। इसके विपरीत, संविधान कितना भी बुरा क्यों न हो, यदि उसको लागू करने वाले अच्छे हैं, तो वह अंतत: अच्छा ही साबित होगा।”

बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम साहब के रास्ते पर चलने वालों ये लाइनें जरूर पढ़ना जो निम्नलिखित है।
“कांग्रेस एक जलता हुआ घर है इसके चार आने के भी सदस्य मत बनना, जो इस जलते हुए घर में जाता है वो जलकर राख हो जाता है”।
~ बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर
“कांग्रेस मीठा जहर है तो बीजेपी तीखा जहर है, ये दोनों चाचा-भतीजे की तरह वाली पार्टियां है जो बहुजन समाज का कभी भला नही कर सकती।
~ मान्यवर कांशीराम साहब

चेतन भारतीय

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