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अभी तक नहीं गया नोटीबंदी का दर्द

मित्रों याद है ना ऐसा ही संबोधन ८ नवम्बर २०१६ को आया था जिसने सभी की दुनिया हिलाकर रख दी थी।

नोटबंदी को दो साल पुरे हो है। जिस समय यह फैसला लिया गया था उस समय कोई इसे विरोध करने की स्थिति में नहीं था।

हालत ऐसे दिखाए गए और खुद के फैसले को कठोर फैसला बोलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचार करते रहे।  फिर भी बहुत से लोग थे जिन्होंने इसे गलत फैसला बताने से गुरेज नहीं किया। कुछ लोग इस तरह भी कह रहे थे अच्छा फैसला पर गलत तरीके से लागू किया गया हैं।

इस स्थिति से आप भी गुजरे होंगे

उत्तर प्रदेश चुनाव का असर इस फैसले पर साफ़ दिखाई दे रहा था इसीलिए सरकार विपक्षी दलों पर राजनीती का आरोप लगाकर खुद का बचाव करती रही। सरकार को और नरेंद्र मोदी जी को उनकी इन बातों की वजह से कामयाबी भी मिली और उत्तर प्रदेश के चुनाव में भाजपा की बम्पर जीत हुई।

भाजपा और नरेंद्र मोदी जी ने सफाई से नोटबंदी में मारे गए या नोटबंदी  जिनकी मौत का कारण बनी ऐसे लोगो को सफाई से नजर अंदाज किया। या यह कह दिया की उनकी नोटबंदी नहीं थी।

पर धीरे धीरे सब पार्टी उतरती गयी। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से नोटबंदी पर झूठे आकड़े पेश करते हुए लगा की यह फैसला उनके लिए बड़ा ही नाकामी भरा रहा। आज तक जो जो बाते नोटबंदी के समर्थन में भाजपा और खासकर नरेंद्र मोदी कहते थे उसमे कोई एक भी कामयाब कामयाब नहीं हुई। चाहे काला धन हो,आतंकवाद का मुद्दा हो,नक्सलवाद हो या डिजिटल लेनदेन हो या नकदी की बाते हो। सभी मुद्दों पर भाजपा और नरेंद्र मोदी मात कहते नजर आए। आज हालत यह है की नरेंद्र मोदी जी ने खुद नोटबंदी के नाम से परहेज कर दिया है।

 

किसी भी तरह से वो नोटबंदी के फैसले से दूर रहना चाहते है। इनकी जगह अरुण जेटली नाकामी भरा बचाव करते नजर आते है क्यों की आखिर वो वित्त मंत्री है।

नोटबंदी क दौर में सबसे ज्यादा नुक्सान आम जनता को ही उठाना पड़ा। किसी किसी को अपनी जान देकर भी इसका पता निचे की फेसबुक पोस्ट से पता चलता है। जिसमे उस दौरान जिनकी मौत की वजह नोटबंदी  रही ऐसे लोगो को याद भी किया गया।

कुछ याद उन्हें भी कर लो ,जो बैंक -एटीएम से लौट के घर न आये। ये उन मृतकों के नाम हैं जो देश के प्रधानसेवक के एक फैसले से…

Ajat Shatru यांनी वर पोस्ट केले बुधवार, ७ नोव्हेंबर, २०१८

नोट -हम इसका दावा नहीं करते की यह लिस्ट पूरी तरह से सही है पर इस से इतना तो पता चलता है की लोगो को सरकारी फैसले से ज्यादा अपने खोये हुए नागरिको की चिंता है जिनको सरकार ने नजरअंदाज किया। 

लेखक : जीवन

लेखक स्वतंत्र विचारक है,और यह उनके अपने स्वतंत्र विचार है।

भारत गन न्यूज़ पोर्टल उनके विचारों से सहमत होगा ही ऐसे नहीं है।

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